Sunday, September 5, 2010

ms blog

kavita

56 ŒéìÌìì Áìó«ì

ÅìסÊÂìû¦Ìì Œöé ŒéÂìû¦Ìì Øìö , íÂìÌìì ‡öØìì ØìÀìó«ì

¸Ãìì¹ì Øìö °ö‘ìì «ììö í¹ìŒéÌìì Áìõסì˜ììÅ Œéì ŒéìÌìì Áìó«ì

ŒéÌìÂìì¦þð ÀììÀìó ¹ìö Œñé™, ‡öØìì ŒéÂììÌì í°‘ìì í°Ãìì

¹ìÀÀì÷ ŒéÅìö¦þ °ö¹ìö ¯ìö , ¹ìì÷ Øìì÷ ŒéÅìö¦þ í°Ììì í°Ãìì

°ö¹ìö ÐììÌìì «ììö °íÅÃììí°Ìì , ºìì¹ìö ÐììÌìì Ú÷ íÁìÁìó«ì -------

íšì¸ìÅ °ö‘ììö „¸ìÅ Úð , ŒéìíÌì‘ì ºìñ«ìð í°‘ì¹ìö Ìì”ìð

Áìõסì˜ììÅ Œéð Úì¡ Âìöû , Øì­ìì ‘ì¦þð íÀìŒé¹ìö Ìì”ìð

ŒéÌìÂìì¦þð Œéìö šìì¹ìÌìì ö Ú÷ Úì‚ËŒéÂìì¹ì Œéì ºìŒéì °ó«ì ------

íÂìÌìšìñÌì Œöé ØìÀì ‘ììÅÚö ‡öØìð Âì˜ìð ºì÷Øìö Œéð Ììó¡

Àìö¡ì ‘ììöÌìö Œéºì¹ìð , ì÷Å Àììºì ¹ìö °ð ºìóÅð ™ó¡

Àììºì Àììø¡ö ÅöÐì¦þð «ììö ‘ììÃìö”ìì Úð ºììºìð ºìó«ì -----

íšìØì íšìØì ¹ìö Âìñ£ð ”ìÅÂì Œéð , ÐìÚð ¤öŒöé ºìì ”ìÃìö

ØìÌììÚŒéìÅ ¹ìö °ð ØìÌììÚ , °ìö¹ììöû ŒéÂìðÑì¹ì ‘ìì”ìÃìö

ÂììÌì «ììö –ìí¡Ãìì Ìì”ìö”ìì, ˜ììÚö ºìð™ö Àììšìö šìó«ì ------

ìÌìì ŒéÂìì¹ì «ììö Øììö”ìÃìì , Ììö ˜ìì°Å ¸ììö‚Ë Úñ‚Ë

Âì¹ìÂììöÚ¹ì í¹ìíÌì˺«ì Ú÷û ,ì÷Å Øììöí¹ìÃììø Øììö‚Ë Úñ‚Ë

ºììÅÐì«ìð Øììö‚Ë ºì¦þðêû , ÁììöÌìì Ìì”ìì Ììö¡ö ÁìÁìó«ì -----

Friday, September 3, 2010

badhtee intolrence

आजकल ऐसी ऐसी घटनाएँ होरही हैं की उनको देखकर दुःख होता है की हमारा समाज जा कहाँ रहा है . आगरा में भेंस को खूंटे पर बांधने जैसी छोटी बात पर एक व्यक्ति की लाठियों से पीट पीट कर निर्मम ह्त्या करदी गयी . दूसरे दिन खबर छपी कि किसी बात पर झगडा होने पर सपा नेता ने बैरे की ह्त्या करदी . कहीं कार चालक द्वारा पास न देने पर दूसरे कार चालक को जान से मार दिया . हमारी सहिष्णुता इतनी कम क्यों होती जा रही है .समाज में हिंसा व असहिष्णुता की बढ़ती प्रवृत्ति चिंता का विषय है जिस पर समय रहते विचार किये जाने की आवश्यकता है . कहीं हमारी संस्कारहीन शिक्षा पद्धति तो जिम्मेदार नहीं इस अराजकता के लिए.

badhtee intolrence

आजकल ऐसी ऐसी घटनाएँ होरही हैं की उनको देखकर दुःख होता है की हमारा समाज जा कहाँ रहा है . आगरा में भेंस को खूंटे पर बांधने जैसी छोटी बात पर एक व्यक्ति की लाठियों से पीट पीट कर निर्मम ह्त्या करदी गयी . दूसरे दिन खबर छपी कि किसी बात पर झगडा होने पर सपा नेता ने बैरे की ह्त्या करदी . कहीं कार चालक द्वारा पास न देने पर दूसरे कार चालक को जान से मार दिया . हमारी सहिष्णुता इतनी कम क्यों होती जा रही है .समाज में हिंसा व असहिष्णुता की बढ़ती प्रवृत्ति चिंता का विषय है जिस पर समय रहते विचार किये जाने की आवश्यकता है . कहीं हमारी संस्कारहीन शिक्षा पद्धति तो जिम्मेदार नहीं इस अराजकता के लिए.