सहवाग जैसे जीनियस खिलाड़ी को किसी दुर्भावना से बाहर बिठाल देना उसके साथ बहुत बड़ा अन्याय है । जिस गति से वह रन बनाता है उससे टीम पर से रनगति को कायम रखने का दबाब हट जाता है। एक दिवसीय क्रिकिटमें चालीस रन पच्चीस गेदों में बनाना सत्तर रन अस्सी गेदों में बनाने से कहीं अच्छा है। जो खिलाड़ी अपने रिकार्ड बनाने के लिए खेलते है उनसे सहवाग की तुलना केवल औसत के आधार पर करना नाइंसाफी है। भारतीय टीम में कौनसा ऐसा खिलाड़ी है जिसका स्ट्राइक रेट सौ से अधिक हो।
Monday, January 4, 2010
नए राज्यों के गठन के सम्बन्ध में मेरे द्वारा लिखे गए विचार पर कई टिप्पड़ियां प्राप्त हुईं । छोटे राज्य बनाकर यदि आर्थिक साधनों का यदि समुचित उपयोग किया जा सके तो इसमें बुराई क्या है। जो जो छोटे राज्य अबतक बनाए गए हैं उनमें से लगभग सभी विकास की दौड़ में आगे हैं। पंजाब, हरियाणा , हिमाचल प्रदेश अथवा उत्तराखंड या छत्तीसगढ़ ,सभी विकास में आगे हैं। फिर पञ्च दस नए राज्य बनाने पड़ें तो क्या बुराई है।
दैनिक जागरण में डा महीप सिंह का लेख पढ़ा , जिसमें छोटे राज्यों के सृजन के फायदे बताये गए हैं। मेरे विचार से उनका यह कहना बिल्कुल सही है कि बहुत बड़े राज्यों को प्रसाशनिक दृष्टि से मैनेज करने में कठिनाई होती है। जहाँ एक तरफ़ दस लाख आबादी वाले राज्य है वहां उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्यों को बनाए रखना बुद्धिमानी नही है। छोटे राज्यों में सत्ता का विकेंद्रीकरण होता है तथा जनता की स्थानीय जरूरतों को समझने में सुविधा होती है। राजस्व का बेहतर निवेश किया जा सकता जिससे विकास की गति तेज करने में मदद मिलती है। राज्य के सभी भागों में समान विकास किया जा सकता है जिससे असमानता को कम किया जा सकता है।
वीरेंदर सहवाग द्वारा एक बार फ़िर धमाकेदार परी खेलकर दिखा दिया है किवास्तव में वह बहुत उम्दा खिलाड़ी है। वह कभी रिकार्ड बनानेके लिए नहीं खेलता है ,रिकार्ड तो ख़ुद व ख़ुद बन जाते हैं। भारत की तरफ़ से तिहरे सतकलगाने वाला वह अकेला खिलाड़ी है वह भी एक नहीं दो बार। सबसे तेज २५० बनाने वाला विश्व रिकार्डधारी तथा उसके पञ्च दोहरे शतक सबसे तेज बनाए गए दस शतकों में शामिल हैं। वनडे में केवल औसत की बात करना पूरी तस्बीर नहीं दिखाता है क्योंकि यदि तुक तुक करके बनाए गए रन किसी काम के नहीं होते जबतक कि बहुत कम स्कोर उया बनाना हो। अतः सहवाग की महानता इन सब बात का ध्यान रखते हुए आक्नी चाहिए।
Monday, December 14, 2009
नए राज्यों के गठन की मांग के सम्बन्ध में राजनीति शुरू हो चुकी है। सभी दल अपने अपने राजनीतिक हानि लाभ के अनुसार प्रतिक्रिया व्यक्त कर रहे हैं। छोटे राज्यों के गठन से निश्चित रूप से विकास की गति तेज करने में सुविधा होती है। विकास के लिए उपलब्ध धन का उचित विकेंद्रीकरण व विकास की वास्तविक आवश्यकता के अनुसार धन खर्च होता है। उदहारण के लिए उत्तराखंड का विकास जिस गति से होरहा है , उसका हवाला दिया जा सकता है। अतः इस विषय में बिना राजनीतिक हानि लाभ का ध्यान रखते हुए सोचा जाना चाहिए।
केन्द्र सरकार द्वारा तेलंगाना राज्य की मांग मानकर छोटे राज्यों के गठन की मांग को एक बार फ़िर हवा देदी है। अब हरित प्रदेश, बुंदेलखंड व विदर्भ को नया जिला बनाने की मांग जोर शोर से उठना स्वाभाविक है । मेरे विचार से यदि इन मांगों पर एक साथ गंभीरता से विचार कर लिया जाय तो इसमें कोई बुराई नहीं है। छोटे राज्यों का गठन वहां की जनता के लिए लाभकारी ही रहा है। पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, छत्तीस गढ़ और उत्तराँचल राज्यों का बनना उस क्षेत्र की जनता के लिए शुभ रहा है। इन का विकास त्वरित व समग्र हुआ है। अन्य बंधुओं के विचार इस बिन्दु पर आमंत्रित हैं।
में एक सरकारी विभाग में अधिकारी के पद पर कार्यरत हूँ .जो सही लगता कह देने की आदत है जिसके कारण अपने उच्चाधिकारियों से सामंजस्य बिठाने में अक्सर कठिनाई आती रही है. कार्य का सही आकलन आजकल नहीं होता है यह मेरा अट्ठाईस साल का अनुभव बताता है.|
आज की स्थिति थोड़ी भिन्न है क्योंकि अब मैं लगभग तेतीस वर्ष की सरकारी सेवा पूर्ण करने के बाद विभाग के वरिष्ठ पद पर कार्यरत हूँ | मेरा अपना अनुभव बताता है की प्यार मुहब्बत और अपने अधीनस्थों की समस्याओं पर सहानुभूतिपूर्वक ध्यान देकर उनसे अधिक कार्य कराया जा सकता है |